प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी बयान में कहा गया कि ठाकुर ने स्वतंत्रता से पहले अविभाजित बंगाल में अपना पूरा जीवन वंचितों, दबे कुचले लोगों की बेहतरी के लिए समर्पित किया। उनके द्वारा अब के बांग्लादेश स्थित ओरकांडी में वर्ष 1860 में शुरू सामाजिक और धार्मिक आंदोलन से मतुआ धर्म की स्थापना हुई। from India TV Hindi: india Feed https://ift.tt/OM12egi
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