नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति आज मौद्रिक नीति की समीक्षा की घोषणा करेगी। यह एमपीसी की 24वीं बैठक है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा पर विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय बैंक आज ब्याज दरों में कटौती से बच सकता है, लेकिन कोरोना वायरस संकट से प्रभावित अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए लोन रीस्ट्रक्चरिंग जैसे अन्य उपायों की घोषणा कर सकता है।
कोरोना के इस संकट से आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार हर संभव कदम उठाने को तैयार है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ईएमआई पर दी गई राहत की सुविधा आगे बढ़ाने के संकेत दिए है। उन्होंने फिक्की के कार्यक्रम में कहा था कि लोन मोरेटोरियम को लेकर बातचीत चल रही है।
कोरोना संक्रमण के आर्थिक असर को देखते हुए आरबीआई ने मार्च में तीन महीने के लिए मोरेटोरियम सुविधा दी थी। यह सुविधा मार्च से 31 मई तक तीन महीने के लिए लागू की गई थी। बाद में आरबीआई ने इसे तीन महीनों के लिए और बढ़ाते हुए 31 अगस्त तक के लिए लागू कर दिया था।
खुदरा मंहगाई दर छह फीसदी से ज्यादा हो चुकी है और जो आरबीआई के दायरे से बाहर है। ऐसे में कई एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि आरबीआई रेपो रेट कटौती के मामले में अपना कदम रोक सकता है। फरवरी के बाद से रेपो रेट में 1.5 फीसदी की कटौती हो चुकी है। बैंकों ने भी नए कर्ज पर 0.72 फीसदी तक ब्याज घटाया है। इसलिए इस बात की संभावना कम लग रही है की रिजर्व बैंक नीतिगत ब्याज दरों में कटौती करेगा। हालांकि कुछ बैंकों और विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार भी रेपो रेट में चौथाई फीसदी की कटौती कर सकता है।
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via liveindia

